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महाराष्ट्रा के ठाणेजिले मे आदिवासियो की बन्धुआ मजदुरी मे हो रही मौते एवम शोषण के सम्बन्ध में।

Anti Violence Initiative, Latest

सेवा मे,                                       3 जनवरी 2012

      अध्यक्ष,

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग

   नईदिल्ली

विषय:- महाराष्ट्रा के ठाणेजिले मे आदिवासियो की बन्धुआ मजदुरी मे हो रही मौते एवम शोषण के सम्बन्ध में।

अभिनन्दन !!!

महोदय,

       मै, आपका ध्यान 1 जनवरी 2012 के नवभारत टाईम्स कीखबर “ नये साल की रौनक से अछुता आदिवासी वर्गपरआकृष्ट करना चाहता हुँ। (अखबार की कतरन संलग्न)

      लेख है किमहाराष्ट्राके ठाणे जिले मे बन्धुआ मजदुर प्रतिबन्धक अधिनियम के लागु होने के दो दशक बाद भी ग्रामीणआदिवासियो को बन्धुआ मजदुर के रूप मे शोषित किया जा रहा है। जिला एवम राज्य प्रशासनद्दारा आदिवासियो के हित मे कारगर उपाय नही कर रही है । 22 नवम्बर 2011 को शाहपुरतालुका के शेरे गांव मे मालिक की पिटाई से आदिवासी मजदुर झुपर्या मुकने की मौत होगयी ।  घटना के 15 दिन बाद भाईदर के पासबलुआअ गांव के मजदुर रामदास बलवी की पिटाई से मौत हो गयी । दोनो हीए ईट-भट्टे परकाम करते थे  ।

  जिला प्रशासन कीलापरवाहीभट्टा मालिको से कथित मिलि भगत की वजह से आदिवासी मजदुरो की मजदुरी तथाशोषण लागातार जारी हैभट्टा मालिक मजदुरो को बन्धक बनाकर रखते है और अगर कोईभागने पर उन्हे मारा-पिटा जाता है ।  मजदुरो के साथ ही उनके परिवार का भी शोषण जारीहै ।  

          महोदय, इस सम्बंध में निवेदन/मांग है कि बन्धुआ मजदुरी सेसम्बन्धित प्रकरण की स्वतंत्र व उच्च स्तरीय जांच करायी जाय । झुपर्या मुकने तथारामदास बलवी के परिवार वालो की सुरक्षा एवम मुआवजा दिया जाय,मजदुरो के बच्चो एवमपरिवार वालो को मुलभुत सुबिधाये दी जाय। कृपया, अतिशीध्र आवश्यक कार्यवाही करने काकष्ट करे जिससे आदिवासी मजदुरो को न्याय मिल सके । 

 

डा लेनिन

(महा सचिव)

मानवाधिकार जननिगरानि समिति



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